Chitran - Adarsh Tiwary

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चित्रण 
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चौकोर सफ़ेद पन्ने सा जीवन चरित्र था मेरा
कोई दाग नहीं, कुछ भी नहीं, अंत किनारा गहरा
जब बरस पड़े कुछ रंग, लाल हरे नीले से सारे
चित्र बना वो ऐसा , सुनहरे चमक मे इंद्रधनुष उखर पड़ा हो जैसे

कागज के कश्ती बन, दरिया मे मैं बह चला
कश्ती और पानी का, शुरू हुआ यूं सिलसिला
थपेड़ो को झेलता, तूफानों से खेलता
आगे बढ़ चला मैं काफिर सा फुहारो संग संभालता

तूफानो के आगाज से कायर सदैव घबराते हैं,
रंग भरी इस दुनिया मे, कोरे ही रह जाते हैं
जो सैलाब न आते तो ठहराव का जिक्र न होता
जो फुहारे समझ इन्हे पार न करते, उन्हे वीर कहा ना जाता

रास्ते आसान सभी को भाते है,
कुछ अपने रास्ते खुद लिख जाते है
जोखिम उठाना हर एक के बस का नहीं,
 चुने कल को गढ़ने के अपने माने होते हैं


रास्ता नया हर वक़्त सहारे को पुकारा करती है
हर शाम ढलने पर निशा सूरज को आवाज़ देती हैं
आत्म परिभाषित ये जीवन का मेरा यह एक अंश हैं
प्रीत संकल्प का चित्रण है, यह मेरे स्वेत लेखन मे।।

- आदर्श तिवारी
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