Dhanyawaad - Mamta Sharma

धन्यवाद
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पञ्च तत्वों को देह में गढ़ कर ,
उसमें देते प्राण को धर ,
लीला में हमको रचते
धन्यवाद स्वीकार कीजिये   

माटी के तन में अपनी,
 छवि को दिखला- दिखला कर,
हम जैसों के मन को छलते
धन्यवाद स्वीकार कीजिये

कण कण में फैला ज्योति को ,
अनहत - आहत में रमते ,
मंद - मंद उस पर हँसते
धन्यवाद स्वीकार कीजिये


ओर - छोर पता किसी को ,
राह सुगम या अगम रस्ते ,
कस्तूरी बन, मन बसते 
धन्यवाद स्वीकार कीजिय

वाष्प में ढल मेघों में बदल,
हिम बन नदी झरनों में चल,
सागर वत हमको धरते  

धन्यवाद स्वीकार कीजिये

- ममता शर्मा 
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