Bharat ka yuvak - Puneet Jain

--------------------------------------------------
भारत का युवक
--------------------------------------------------

युवा हूँ मैं नव भारत का, युवा हूँ में इस समाज का ,
हीरा हूँ में राष्ट्र उन्नति के इस सुनहरे ताज का .

ठान लू 'गर में कुछ भी, तो कर दिखलाता हूँ ,
नव अंकुरित पौधे से विशाल वृक्ष बन जाता हूँ .

हिला न सके मुझको कोई ऐसी बुनियाद हूँ में ,
बदलना पड़े देश को कानून ऐसी फ़रियाद हूँ में .

खेल, शिक्षा, व्यापार, समाज हर जगह परचम फेहराया हैं ,
आज मेरी ही बदोलत ऊँचे शिखरों पर भारत का ध्वज लहराया हैं .

बस सकू सबके दिलो में , ऐसा युवा बनू में इस समाज का ,
धर्म, जात-पांत में ना पडू, पाठ पदु नैतिक रिवाज़ का .

बनू श्रवण सा आज्ञावान, अर्जुन सा धीर गंभीर ,
बन पथिक हिमालय का , होउ उनती शिखर का अधीर ,

युवा हैं तू आज का.....
सत्य को हत्यार बना , आत्मसमान को सारथि,
निर्भय हो चला चल, रुकना ना ऐ भारती .
तू हैं भविष्य भारत का, तू हैं इसकी आरती

बना वही भारत, जो गाँधी का अपना था ,
जला दे वही ज्योत, जो नेहरु जी का सपना था .

उठ जाग मुसाफिर नया लम्बा सफ़र तय करना हैं,
संसार में फिर से नया जोश भरना हैं .

लौटना है तुझे हर माँ का सम्मान,
बना रहे हर वीर का बलिदान ,

हो पुरे संसार को तुझे पर नाज ,
उठ जाग युवा. पहना दे भारत को उसका ताज ।

 - पुनीत जैन

--------------------------------------------------

2 comments:

Bharat Tripathi said...

VERY NICE

Bharat Tripathi said...

VERY NICE

Post a Comment