Bechari Hawa - Mamta Sharma

"बेचारी  हवा"
-------------------------------------------------
हवा सुहानी चली बेचारी तो घबराये पत्ते ,
होते पीले, लाल, सुनहरी ज्यों ज्यों दिन हैं चढते

जैसे ही तुम आयीं रानी हवा हमें यूं लागा,
जो था जीवन बचा - खुचा वो भी झोंका ले भागा

उधर खबर सुन मलय बसंती आती है इस ओर
छोटे पौधे घबराए डालियों के दिल चोर .

आती होगी अभी वो  भैया, हम होंगे बस तीर ,
ये जो पुरवा मस्तानी है ये देती है पीड

चिड़िया रानी भी बोली उस अल्ल्हड़ मस्तानी से,
जरा ठहर तो हवा , उड़ा घर तेरी शैतानी से

चली हवा तो बने कई मुँह, वो भी कहाँ सुनती है
धूल की  चुनरी सर पर ओढ़े हवा तो बस उडती है .

मैं लाती हूँ नयी बहारें , मैं लाती हूँ कोपल,
अगर नहीं सीखा है तुमने, ठहरो सीखो दो पल।

छोटे पौधों अब तुम बनो सुदृढ़, रहो सुकुमार ,
शाखाओं तुम झुकना सीखो ,अकड़ो हर बार .

सुनो सुनो चिड़िया महारानी, जब से मैं हूँ आई,
वर्षा ,जाड़े ,पाले की मुश्किल है दूर भगाई।  

अब भी गर तुम नहीं हो खुश तो, जरा करो तुम गौर ,
मेरे आने से हर सूँ रंग, हो जाता है कुछ और।

थोड़े दिन को आती हूँ, मौसम करती रंगीन ,
छोड़ो अपनी -अपनी ढपली, मेरी सुन लो बीन।

- - ममता शर्मा - -

------------------------------------------------------

0 comments:

Post a Comment