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|| आपकी सेवा में देश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा रचित चुनिंदा हिन्दी कविताओ का अनूठा संकलन ||
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Saturday, May 11, 2013

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Mujhko itni himmat dilwa de - Ajay Tiwary

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मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे +
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कोलाहल से ऊपर उठती हो
ऐसी बुलंद आवाज़ दिलवा दे|
उल्टी धार में भी मुझको
पतवार चलाना सिखला दे|
रेंग रहा हूँ पृथ्वी पर कब से
मुक्त आकाश की पतंग बनवा दे|
मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे|

आलोचनाओं के झंझावातों में भी
सिर ऊंचा रखना सिखला दे|
मुश्किलों के अंधड़ में भी
वक्ष खोल चलना सिखला दे|
अत्याचारों को सहने की
कायरता से मुक्ति दिलवा दे|
मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे|

सच को सच कह पाऊँ जो
ऐसी अद्भुत शक्ति दिलवा दे|
रिपु को गले लगा लूँ  जो
ऐसी चमत्कारिक युक्ति बतला दे|
तुझसे विश्वास न हटे कभी
ऐसी अविराम भक्ति दिलवा दे|
मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे|

दुर्गम पथरीली राहों पर निर्भय
आगे बढ़ने के गुर बतला दे|
प्यार की खातिर ग़म सहने का
पर्वतसम सम्बल दिलवा दे|
उगते सूर्य की प्रथम रश्मि का
एक अग्रणी अश्वारोही बनवा दे|
मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे|



दुखियारों के दुख में हमदम हो
आँसू दो बहाना सिखला दे|
कृत्रिमता में जकड़े जग में
पुनः बाल्यसम किलक बँटवा दे|
अपनी कमियों पर हँस कर
अपनाने का रज सिखला दे|
मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे|

~~ अजय तिवारी ~~

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