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|| आपकी सेवा में देश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा रचित चुनिंदा हिन्दी कविताओ का अनूठा संकलन ||
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Tuesday, March 26, 2013

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Aadhunik - Vaisshali S Behani

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आधुनिक
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बदल रहा है दौर सारा ,
सब कुछ है बदला -बदला सा ,
नया ज़माना नए है रंगरूप ,
नया चलन है बहुरूप !



बोल चाल का ढंग बदला,
सोच विचार का रूप बदला,
क्या बदला है स्वरुप माँ का?
क्या बदली है ममता उसकी ?



क्यों न ममता आधुनिक हो जाये ?
क्यों अब भी रोये-चिल्लाए ?
क्यों वो दे कुर्बानी खुद की ?
क्यों वो हरपल नीर बहाए ?
क्यों न वो आज़ाद हो जाये ?



संतान अब तक बदली बदली
क्यों न अब ममता बदल जाये ?
संतानों की हर एक गलती पर
क्यों न अब वो सबक सिखाए ?



मुख मोड़ती थी संतान अब तक,
क्यों न माँ यह चलन अपनाये ?
हो जाये गर स्वार्थी माँ तो,
क्या हमे यह स्वीकार होगा ?



आधुनिकता के इस दौर में ,
माँ की है वही कहानी।
बदला कहाँ है ज़माना यारों
ममता अब भी है पुरानी।।

~~ वैशाली बहानी ~~

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