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|| आपकी सेवा में देश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा रचित चुनिंदा हिन्दी कविताओ का अनूठा संकलन ||
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Sunday, June 17, 2012

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Yun hamse na ruthe zindagi - Ankita Jain

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यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी
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यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी,
अभी सफ़र बहुत लम्बा है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी,
अभी राह बहुत कठिन है बाकि...
तुम न साथ हुईं तो थम जाएँगी
जो गिनी चुनी सांसें हैं बाकि...
तुम ठहरी तो रुक जाएँगी
जो कुछ पल की धड़कन हैं बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी.............................!!

अभी तो कुछ दिन पहले मैंने,
तुम्हे बहुत समझाया था...
तुम रोयीं थी तो तुमको मैंने,
प्यार से गले लगाया था...
फिर क्या बदला है आज और कल मैं,
या कल का गुस्सा ही है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी,
अभी सफ़र बहुत लम्बा है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी...............................!!

अच्छा बैठो तुम्हे याद दिलाऊँ,
बीते कल का वो एक किस्सा...
जिसमे हम तुम पास थे कितने,
खुशियाँ थीं हर पल का हिस्सा...
माना कि वो बीता कल था,
पर आने वाला कल है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी,
अभी सफ़र बहुत लम्बा है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी................................!!

चलो आज, एक वादा कर दूँ,
कि तुम्हे कभी रोने न देंगे...
माना कि है कठिन निभाना,
पर टूटे न ये दुआ करेंगे...
अब तो हंस दो मान भी जाओ,
पोंछ लो आँखें जो नमी है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी,
अभी सफ़र बहुत लम्बा है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी..................................!!
 
~~ अंकिता जैन ~~
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