=============================================================================================================================
|| आपकी सेवा में देश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा रचित चुनिंदा हिन्दी कविताओ का अनूठा संकलन ||
=============================================================================================================================

Sunday, May 22, 2011

, , , , ,

Shabdo ki paribhasha - Vikas Chandra Pandey

Share
_____________________________________

शब्दों की परिभाषा - विकाश चन्द्र पाण्डेय
_____________________________________


कुछ रिश्तो की परिभाषा अलग सी होती हैं ,
अधुरें ख्वाबो की अधूरी कहानी होती है .
चाहता हु इन्हें शब्दों में पिरोना ,
पर कुछ यादें रोकती है.

इस परिभाषा की भी एक अलग ही दिशा है ,
इन अनकही बातों की भी एक वजह है .
चाहता हूँ इन यादों को भुलाना,
पर कुछ बातें रोकती है.

सभी ख्वाब कभी पुरें नहीं होते ,
परछाइयों के कभी चेहरे नहीं होते.
चाहता हु इन खाव्बों को पूरा करना,
पर कुछ रातें रोकती है.

शायद इस परिभाषा में कुछ अधूरापन हो,
या फिर मेरी अशिमित सोच का प्रवाह हो.
पर वो बातें आज भी गूंजती है,
वो यादें आज भी याद आती है.
वो सपने आज भी जगातें है ,

वो अनकही बातें आज भी मेरी गलतियां याद दिलाती है.
चाहता हु इन्हें आज भी सुधारना,
पर अब उसकी खुशियाँ मुझे रोकती है.
उसकी दुनिया मुझे रोकती है....

'' विकास चन्द्र पाण्डेय ''
_____________________________________

1 comments:

  1. beautiful line.....seedhi sacchi aur dil ko chune wali....gr8

    ReplyDelete