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|| आपकी सेवा में देश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा रचित चुनिंदा हिन्दी कविताओ का अनूठा संकलन ||
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Thursday, April 21, 2011

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padhai kar siyu - Omprakash Mandaar

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 हूँ पढाई कर स्यूं  - ओमप्रकाश मंदार
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बापू मत कर मेरो ब्याव, हूँ पढाई कर स्यूं !
छोटी उमर में ब्याव करयो, म्हारो जीव घणो दुख्लायो,
म्हारी भावना मिले रेत, क्यूँ हाथां जुलम कमायो !
बापू मत ले राड़ उधारी, हूँ पढाई कर स्यूं !
बापू मत कर मेरो ब्याव, हूँ पढाई कर स्यूं !!

पढना की जद रुत आवे, घर की सोच अकावे,
अनपढ़ रहयाँ मानखो, धुड में मिल जावे,
बैठ्यो जीवन भर पछतावे, हूँ पढाई कर स्यूं !
बापू मत कर मेरो ब्याव, हूँ पढाई कर स्यूं !!

पढ़यां "फुलियो" बणगयो फोजी, "राणीयो" बणयो पटवारी,
अनपढ़ रहियो "लालियो", बो तो फिरे बकरियां लारी,
बो तो करे गधे सुं यारी, हूँ पढाई कर स्यूं !
बापू मत कर मेरो ब्याव, हूँ पढाई कर स्यूं !!

पढ़यां "कालियो" बणग्यो कलेक्टर, जाण दुनिया सारी,
रेवण नै बंगलो मिलग्यो, फिरण नै जिप्सियाँ न्यारी,
बो तो ऐस घणी मनावे, हूँ पढाई कर स्यूं !
बापू मत कर मेरो ब्याव, हूँ पढाई कर स्यूं !!

पढ़यां "दुलियो" बणग्यो डाक्टर, हुग्यो मालामाल,
अनपढ़ रयां कुहावे "पणियो"", पढ़यां ""पन्नालाल"",
"सिरियो"-"श्रीराम" कुहावे, हूँ पढाई कर स्यूं !
बापू मत कर मेरो ब्याव, हूँ पढाई कर स्यूं !!

अनपढ़ "नाथू" गी छोरी गै, टाबर दरजन सुं भी पार,
पाणी लेवण जद बा जावे, लारे रवे सगली लंगार,
बिने शरम घणी ही आवे, हूँ पढाई कर स्यूं !
बापू मत कर मेरो ब्याव, हूँ पढाई कर स्यूं !!

जमीदार देवे एक हज़ार, अंगूठा बीस लगाय,
बापू गो सिर हालण लाग्यो, बात समझ म आय,
मूलकण लागी मन मे म़ाऊ, हूँ पढाई कर स्यूं!
बापू मत कर मेरो ब्याव, हूँ पढाई कर स्यूं !!

~~ ओमप्रकाश मंदार ~~
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