Abhi Tak Baaki Hai - Ankita Jain "Bhandari"

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अभी तक बाकी है - अंकिता जैन
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इन थकती आँखों में, अब भी सपने बाकी हैं,
ढलते सूरज की किरणों में, अब भी गर्माहट बाकी है |
लुट गया था वो, जब तेरा साथ छूटा,
पर उस हसीन साथ का अहसाह अभी तक बाकी है ||

तेरी मदहोश आँखों में जाने क्यूँ वो ऐसा खोया,
भुलाकर खुदको, था उसने हसीं ख्वाब संजोया |
डूब चूका था वो, जब तेरी आँखें मुंदी,
पर उन ख्वाबों के खंडर अभी तक बाकी हैं ||

तेरे लफ़्ज़ों में जाल में वो कुछ ऐसा फसा था,
अथपर था वो जाने ये केसे फंदा बुना था |
टूटकर मिट गया वो, जब वो जाल सुलझा,
पर उस जाल के चिपके रेशे अभी तक बाकी हैं ||

ढलने लगी है अब रात और थमने लगी हैं पलकें,
पर इन पलकों पर बिखरे मोती अभी तक बाकी हैं |
इन थकती आँखों में, अब भी सपने बाकी हैं,
ढलते सूरज की किरणों में अब भी गर्माहट बाकी है |

अंकिता जैन
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