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|| आपकी सेवा में देश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा रचित चुनिंदा हिन्दी कविताओ का अनूठा संकलन ||
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Tuesday, March 8, 2011

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Naari Shakti - Ankita Jain

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नारी शक्ति
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कभी हारती हूँ, कभी गिरकर संभालती हूँ,
डरती भी हूँ पर मुश्किलों से निकलती भी हूँ !
बस करो अब और न दो नाम कमजोरी का ,
मानो या न मानो पर तेरे इस जीवन की दायनी हूँ !!


कभी जो हो शक मेरी शक्ति का ,
तो पलट लेना इक बार पन्ने इतिहास के !
संघार किया है दुष्ट दानवो का ,
कभी मैं दुर्गा तो कभी काली भी हूँ !!


ना करना बात अब रुकने की मुझसे,
छूना है मुझे भी अब उस आसमा को !
शक हो इस पर भी तो पूछ लो अन्तरिक्ष से,
मिली थी उससे रूबरू मैं इसी कल्पना हूँ !!


है विनती आज मेरी बस इतनी सी,
ना मारो मुझे और ले लेने दो सांसे !
रोक दो ये अनर्थ वरना देखोगे एसा कल भी,
जब तुम लेना चाहो जीवन और मैं ना रहूँ !!

~~ अंकिता जैन ~~

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6 comments:

  1. another marvelous poem by miss Ankita jain..!!
    Incredible !!

    How do u think so deeply...amazing poem :)

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  2. Hi Ankita, here is your answer -
    kyu shakh ho teri shakti ka,
    tu durga, tu kaali tune dusto ka naash kiya.
    Chu liya tumne toh aasma,
    Rukne ki kaha baat hui.

    vinti na kar do saanso ki,
    tum janani, sanskarti ki wahak ho.
    itihas kya gawah hoga,
    doshi toh hum hai, tum toh nyaaykarta ho.
    Reply

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  3. Sandesh...really superb ans...thanks for your respectable feelings for womens..:)

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  4. You're welcome. I have respectable feelings for everyone. But i have special respect for you. Your poems are really very touchy one. keep on writing such poems and i will keep on appreciating you. take care !

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