Maa - Ankita Jain

____________________________________________
माँ - अंकिता जैन
____________________________________________ 

उसकी हर धड़कन में होता है सिर्फ तुम्हारा नाम ,
शायद ही कोई लम्हा ना लिया हो तेरा नाम !

अपने आंसुओं को छुपाकर तुम्हारी खुशियों को महकाया है उसने ,
उसकी दुनिया में होते हैं सिर्फ तुम्हारी आँखों के सपने !
तुम्हारी हंसी की किलकारियां महकाती हैं उसका आँगन ,
तुम्हारी आँखों के आंसू भिगो देते हैं उसका मन !

वो तो होती है ममता की मूरत ,
जिसकी आँखों में होती है सिर्फ तुम्हारी सूरत !
तुम्हारी फर्मायिशों से बढ़कर ना समझा कभी कोई दूसरा काम ,
उसकी हर धड़कन में होता है सिर्फ तुम्हारा नाम !!

तुम्हारी गल्तियों पर वो नाराज़ भी होती है ,
पर तुम्हे रुलाकर चुपके से खुद भी रोती है !
जाते ही तुम्हारे नज़र उसकी द्वार पर होती है ,
और वापसी की खबर से उसकी खुशियाँ दुगनी होती हैं !

हर दुःख से परे होता है माँ का आँचल ,
तुम्हारी आँखों की चमक होती है उसकी आँखों का काजल !
तुम्हारी एक मुस्कराहट होती है उसका मुकाम ,
उसकी हर धड़कन में होता है सिर्फ तुम्हारा नाम !!

~~ अंकिता जैन ~~

____________________________________________ 


7 comments:

asmita said...

unconditional love,,,,,,,,

Ankita Jain said...

really it is..:)

vikas chandra pandey said...

thoughts unpredicted... superb!

vishal said...

wow...super like to dis poem...!!
keep on writing such poems :)

Ankita Jain said...

vikas @ thanks...:)
Vishal @ thanks..:)

Sandesh said...

Having hostel life. really it is superb poem !

Ankita Jain said...

thanks..:)

Post a Comment