Kya Hai Holi - Ankita Jain

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क्या है होली  - अंकिता जैन (भंडारी)
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था एक सेवक कृष्ण का, अदभुत थी जिसकी भक्ति ,
जल गयी होलिका तेज़ से उसके, ऐसी थी भक्ति की शक्ति !



टूटा ना विश्वास जिसका, अचल था जो स्वाभिमान का,
और किया अंत फिर इक बार, उस झूठे अभिमान का !
ना मानी हार तो जीतोगे इक दिन,
इक छोटे से बालक ने, दिया पैगाम इस बात का !
कह गयी होलिका हुई मैं पावन, और मिली नरक से मुक्ति,
था एक सेवक कृष्ण का, अदभुत थी जिसकी भक्ति !!

फागुन के इस पावन माह में, जब चाँद पूर्ण हो जाता है,
नए पत्तों, फूलों के संग, तब रंगों का त्यौहार आता है !
त्योहारों के इस देश में, जहाँ जाति, भाषा का अंतर है ,
वहां होली का ये त्यौहार आता, बनकर इन सबका संगम है !
देकर इन रंगों को जिसने, की थी पावन मिट्टी,
था एक सेवक कृष्ण का, अदभुत थी जिसकी भक्ति !!



रंगों का ये त्यौहार, है दिन राधा कृष्ण के प्यार का,
फिर क्यूँ मानते हैं हम इसको करके अपमान प्रकृति का !
कट जाते हैं वृक्ष युहीं, और घट जाता है पानी,
गर हम ही ना समझे तो फिर, वो किसे कहे ये दुखद कहानी !
करके दूषित अनमोल देन, ना मिटाओ अपनी ही हस्ती,
था एक सेवक कृष्ण का, अदभुत थी जिसकी भक्ति !!

~~ अंकिता जैन ~~
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