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|| आपकी सेवा में देश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा रचित चुनिंदा हिन्दी कविताओ का अनूठा संकलन ||
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Friday, March 11, 2011

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Haal-e-Dil - Kritika Jain "Bhandari"

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हाल ए दिल - कृतिका जैन(भंडारी)
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हाल क्या है मेरा,
तुम्हे ये सुनाऊ कैसे !
ज़ख्म मेरे दिल में भी हैं,
तुम्हे वो दिखाऊ कैसे !!

हर पल तेरी आँख से निकले,
यूँ दर्द के किस्से !
मगर कुछ हमने भी खोया है,
तुम्हे ये दिखाऊ कैसे !!






मेरी हर बात का तुमने,
गलत मतलब रखा !
राज़ अब उस बात का मैं,
तुम्हे समझाउं कैसे !!

तुमने तो कह दिया,
धोखा मिला तुम्हे प्यार में !
पर तेरे दिल में भी बेवफाई थी ,
तुम्हे ये जताऊ कैसे !!



~~ कृतिका जैन (भंडारी) ~~
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3 comments:

  1. nice lines....really touching..:)
    keep it up ....keep writing
    all d best

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  2. thankx vishal..
    thankx ankita di..:)

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