Haal-e-Dil - Kritika Jain "Bhandari"

________________________

हाल ए दिल - कृतिका जैन(भंडारी)
________________________

हाल क्या है मेरा,
तुम्हे ये सुनाऊ कैसे !
ज़ख्म मेरे दिल में भी हैं,
तुम्हे वो दिखाऊ कैसे !!

हर पल तेरी आँख से निकले,
यूँ दर्द के किस्से !
मगर कुछ हमने भी खोया है,
तुम्हे ये दिखाऊ कैसे !!






मेरी हर बात का तुमने,
गलत मतलब रखा !
राज़ अब उस बात का मैं,
तुम्हे समझाउं कैसे !!

तुमने तो कह दिया,
धोखा मिला तुम्हे प्यार में !
पर तेरे दिल में भी बेवफाई थी ,
तुम्हे ये जताऊ कैसे !!



~~ कृतिका जैन (भंडारी) ~~
_______________________

3 comments:

vishal said...

nice lines....really touching..:)
keep it up ....keep writing
all d best

Ankita Jain said...

aweosme words dear...:)

Kt said...

thankx vishal..
thankx ankita di..:)

Post a Comment