Fitrat - e~ Mohabbat - Puneet

_________________________

फितरत -ए- मोहब्बत
- पुनीत
_________________________

में कवी नहीं इसलिए कविता नहीं लिखता,
लिखता हु हकीकत इसलिए सपना नहीं लिखता,
मेरी कलम रुक जाती है मेरे ही आंसुओं पे;
इसलिए सिर्फ खुशिया है ,
क्युंकी में गम नहीं लिखता |

कई ज़माने बीते,
अब में परवाह नहीं लिखता,
गुजरे जमानो के हालत नहीं लिखता,
में रोता हु आज के ज़माने की वफ़ा देखकर,
इसलिए वफादार हु ,
क्युंकी में मोहब्बत नहीं लिखता |

दिल साचा है इसलिए दिलदार नहीं लिखता ,
छूट न जाये कोई किरदार
लेकिन कोई कहानी नहीं लिखता ,
टूटा था आशियाना मेरा ,
लेकिन दिल में अरमान अब बी बहुत है ,
पर अब में प्यार की फितरत नहीं लिखता ||

~~ पुनीत ~~
_________________________

1 comments:

Ankita Jain said...

nice poem...

Post a Comment