Basant Ki Bhor - Ankita Jain

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 बसंत की भौर - अंकिता जैन (भंडारी )
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सूरज की उगती पहली किरण,
लहराती हुई  मदमस्त पवन !
गाते पंछी मीठी झंकार,
मौसम में घुली ये बसंत बहार !
जीवन रंगों से भरते हैं,
और ये पैगाम देते हैं !
पतझड़ के दिन अब बीत गए,
आये वृक्षों में पत्ते नए !
गर दुःख है कोई तो अब उसको भूलो,
खुशियों को जीवन में भरलो !
हैं इन्द्रधनुष में सात रंग,
पर काला-सफ़ेद न उसके संग !
फिर हम भी क्यूँ होकर बेरंग जियें,
क्यूँ न जीवन भरपूर जियें !
बस इक कोशिश की देर है,
फिर देख, तेरे जीवन में भी भौर है !!

~ अंकिता जैन ~
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