Aaj Ka Insaan - Ankita Jain

_________________________

आज का इंसान - अंकिता जैन
_________________________


दूर रहने पर इंसान की

अहमियत का पता चलता है,

पड़े जरुरत तब

वफ़ादारी का पता चलता है |



हर कोई यहाँ अपने तेरे में लगा है,

जो दूसरों के लिए सोचे

अब एसा इंसान कहाँ मिलता है |

लड़ने को सभी हर पल तैयार हैं,

हल और सुलह से हर कोई बचता है |


अपना अच्छा सोचें या न सोचें पर,

हर पल दूसरों की बुराई के सपने बुनता है |

शायद इसलिए हर इंसान आज,

अपनों के पास होकर भी अपनों के लिए तरसता है ||




~~ अंकिता जैन ~~

_________________________

2 comments:

vishal said...

true lines....incredible poem..
loved it :)

Ankita Jain said...

thank you..:)

Post a Comment