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|| आपकी सेवा में देश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा रचित चुनिंदा हिन्दी कविताओ का अनूठा संकलन ||
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Tuesday, February 22, 2011

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मिली सच्चाई - अंकिता जैन
Mili Sacchai - Ankita Jain

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इक दिन अनजाने में मिली सच्चाई ,
थोड़ी सहमी, थोड़ी घबरायी ,
धीरे से मुझे पास बुलाकर ,
कहने लगी अब शामत आई ,
आँखों में आंसू भरकर ,
अपनी कहानी मुझे सुनाई ,
कहने लगी सपने में मैंने ,
खतरे सी की इक आहट पाई ,
अपने दिल से मुझे हटाकर ,
झूठ की चादर सबने चढ़ाई,
इक दिन अनजाने में मिली सच्चाई ,
थोड़ी सहमी, थोड़ी घबरायी …..
 





बदल गयी रिश्तों की भाषा ,
प्यार ने ली इक नयी परिभाषा ,

सादगी से दूर कहीं अब ,
प्रदर्शन पर तीर है साधा ,
  कॉलेज में जब पड़ने जाएँ ,
टीचर, लेकचर सभी भुलाएँ ,

हर दिन इक नयी कहानी बनाये ,

झूठ के हर रिश्ते अपनाएं ,
वफ़ा हटाकर हर व्यक्ति ने ,
बेवफाई दिल में है बसाई
इक दिन अनजाने में मिली सच्चाई ,
थोड़ी सहमी, थोड़ी घबरायी ….
                      
                               अंकिता जैन

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12 comments:

  1. thank you "kavitapustak" to publish my poem on homepage..:)

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  2. yet another good one.. keep up the good work!

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  3. Hey...really nice one....gud luck for next one....

    keep it up...<>

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  4. Kanchan @ thanks...:)
    kailash @ thanks..:)

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  5. it's really nice...god bless you

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  6. thoughts beyond any1 imagination actually can say AWESOME!!!

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  7. gaurav @ thanks.:)
    vikas @ thanks.:)

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  8. The last six lines are fabulous. keep on

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  9. This comment has been removed by a blog administrator.

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