Aaj Ke Daanav - Vikas Chandra Pandey

_______________________________
 आज के दानव - विकास चन्द्र पाण्डेय   
_______________________________


हमने सोचा हम मानव हैं, दानव सभी दिए हैं मार!
कभी न सोचा था, फिर होंगे कलउगी दानव से दो-चार!!

भ्रस्टाचार, दहेज, आतंकवाद, ग़रीबी, होंगे नये दानव प्रहार !
इनकी ताक़त हैं हम लोग, कौन इन्हे मारेगा आज!!

सोच रहे हैं सभी, फिर होगा राम-कृष्ण, गाँधी अवतार,
हम क्यों इतना सोचे जब, फिर आएगा तारनहार!

लेना-देना रीत आज की, इसको मत लो दिल पर आज,
भूख और बमो से मरना, अब तो छोटी- मोटी बात!

संस्कार की बात न करना, बची नही अब कोई बात ,
दौड़ रहें हैं सभी यहाँ, मद-माया के पीछे आज!

इक तिलिस्म मे फसे सभी हैं, सब को बस अपनी दरकार,
जब कुछ होगा उल्टा-सीधा, कोसेंगे अपनी सरकार!

~~ विकास चन्द्र पाण्डेय ~~

_______________________________

6 comments:

vikas chandra pandey said...

thnx a lot admin:-)

3ad98a04-42a2-11e0-9ad6-000bcdcb2996 said...

subarb vikas

KavitaPustak said...

welcome, Keep it up,keep writing such nice poems..

vikas chandra pandey said...

@kavita pustak sure and thnx for making it so much imprasive with the help of such a nice snap...

ANKITA said...

really nice words.

vikas chandra pandey said...

@ankita thnx for your appreciation :-)

Post a Comment