=============================================================================================================================
|| आपकी सेवा में देश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा रचित चुनिंदा हिन्दी कविताओ का अनूठा संकलन ||
=============================================================================================================================

Friday, January 21, 2011

, , , , , , , ,

गुमान - डा. लक्ष्मी विमल
(modified by kvp team in sense of restricting religious issues)

Share
____________________________

कैसे हम गुमान करे देश ये महान है |
चीखती है नारियां ,अब करती चीत्कार है ,
नन्ही - नन्ही बालिका का होता बलात्कार है,
आदमी ही बन चूका वहशी , दरिंदा,हैवान है,
कैसे हम गुमान करे देश ये महान है |

मारती है माताएं बेटियों को पेट में ,
झोंकती है सासुएँ आग की लपेट में ,
जब नारियां ही नारियों पर करती अत्याचार है ,
कैसे हम गुमान करे देश ये महान है |

तंग हो गए सुंदरियों के अंग के कपडे ,
देखे तो लगता है ,पहने है वो चिथड़े
यत्र नारी नाग्नते तत्र ही उत्थान है ,
कैसे हम गुमान करे देश ये महान है |

नोचते है नेतागण भारत माँ की बेटियाँ,
सकते है पीढ़ी दर पीढ़ियों की रोटियां
दिल जितना काला, उतना उजला परिधान है,
कैसे हम गुमान करे देश ये महान है |

संत्री पद के लिए ज़रूरी परीक्षा ,
मंत्री पद के लिए क्या सिक्षा,
संसद में होता महाभारत, ये कैसा संविधान है 
कैसे हम गुमान करे देश ये महान है |

भूल गए जब महापुरुषों की कहानियाँ ,
व्यर्थ हो चुकी है सभी कुर्बानियां  
भगत सिंह जैसा अब कहाँ नोजवान है ,
कैसे हम गुमान करे देश ये महान है |

कैसी ये आज़ादी ,कैसा यह देश है,
भ्रष्टाचार में डूबा सारा परिवेश है
दुष्टों के आगे यहाँ तो हरा भगवन है
कैसे हम गुमान करे देश ये महान है |

____________________________

0 comments:

Post a Comment